Wednesday, 22 July 2026

कुछ बोलो जंतर मंतर


 

नहीं ठहरता काल तनिक,

तुमसे जादा कौन जाने।

कितने आए कितने गए,

लंगड़े, बहरे काने।


ज़ख्म दिल्ली के हरे हुए फिर,

आ गए आलमगीर।

रुन्ड-मुन्ड चीखे दारा का,

हाय! हिंद की पीर।


सिसकी फिरती सरस्वती

साधक हुए अधीर।

कुछ बेचारे फाँसी लटके,

हो गए गति वे वीर।


करे खगोल की खड़ी गिनती क्या,

अंतरिक्ष में तारों की।

जरा देख दुर्गत गोदी की ,

भारत वंश चीत्कारों की।


इंद्रप्रस्थ के धर्म महल में

पांडव खाए हंटर।

नहीं सुहाती चुप्पी तेरी,

कुछ बोलो जंतर मंतर।


#जन्तरमन्तर 

#jantarmantar


10 comments:

  1. ठहरता नहीं मगर काल लिखता जरूर है |

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  2.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शुक्रवार 24 जुलाई, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  3. सही कहा है आपने, समय बड़ा बलवान है

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  4. सुंदर सृजन

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