जम्हूरी, जलालत ललाट,
नई सरकार, वही ' सम्राट'।
जो नैतिकता को काट- काट,
और मर्यादा छांट- छांट।
इज्जत आबरू चाट- चाट,
नराधमों में बांट- बांट।
हिंजड़े हाकिम को साट- साट,
इंसाफ की लगी हाट।
हक हुकूक की बंदरबांट
साबूत न कोई बचा पाट।
मानवता की खड़ी खाट
हैवानियत के ठाट- बाट।
बेटी का बाप हांफ- हांफ
बदहवास, घर घाट- घाट।
बेटी बचाओ, बेटी बचाओ,
नई सरकार, वही ' सम्राट'।
--- विश्वमोहन
#बिहारनिर्भया
No comments:
Post a Comment