Friday, 20 February 2026

बेटी बचाओ, बेटी बचाओ।

 चले गए दिन गार्गी के वे,

और मिथिला की राजसभा!

वाचाकनवी ने शिथिल किया,

जब याज्ञवल्क्य की ज्ञान प्रभा।


समय एक सा नहीं है रहता,

कुदरत की है कहर ये भारी।

हाय बिहारी, हाय बिहारी,

तेरी तो गई किस्मत मारी!


हाय, फिसड्डी नौकरशाही,

और सड़क छाप का मंतरी!

अपराधी की गोद में बैठा

नाका -  नाका आला संतरी!


मिनट भर बस लेट हुई थी,

परीक्षा केंद्र की खबर है ताजा।

चढ़ गई बेटी सूली पर

अंधेर नगरी चौपट राजा।


नक्कारखाने में सब मिलकर

आओ, आओ तूती बजाओ।

राजमहल के राज दरिंदो!

बेटी बचाओ, बेटी बचाओ।






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