Saturday, 30 January 2021

गुणवत्ता - लघुकथा

 राजा तो दोनों ही थे। दोनों जनता से चुनकर भी  आए थे। पहले ने अपने मित्रों के साथ गठबंधन कर सरकार बनायी। 'मित्रों' की गुणवत्ता इतनी बढ़िया थी कि उसे दुश्मनों की कोई ज़रूरत ही नहीं पड़ी।

 और दूसरा! अपने दमख़म पर। उसके चारों ओर  केवल दुश्मन ही दुश्मन। किंतु, दुश्मनों की 'गुणवत्ता' इतनी उत्कृष्ट कि अब उसे किसी मित्र की कोई आवश्यकता नहीं! एकला चलो !

24 comments:

  1. बहुत बढ़िया

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  2. कुछ लोग बाहुबल से राजा बनते हैं उन्हें ढ़ेरों गठबन्धन चाहियें, पर जो मनोबल और सुदृढ़ इच्छाशक्ति के चलते राजा बनते हैं उसे कोई बाहुबली दरकार नहीं, वो शत्रुओं से निपटने में अकेला काफी है। सार्थक लघुकथा। सादर 🙏🙏

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  3. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज शनिवार 30 जनवरी 2021 को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. कहीं पर निगाहें कहीं ओर निशाना.. रोचक शैली की रचना,सार्थक।
    एकला चलों ही ठीक है।

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  5. गूढ़ रचना माननीय।

    परीक्षा में फेल होने बचना है तो चलो चोरी कर लें...
    ये गठबंधन वाले कुछ इसी तर्ज पर होते हैं।
    अपने बल पर अव्वल आने वाला ही नेतृत्व का अधिकारी होता ।

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  6. गूढ़ संदेशात्मक सुंदर रचना।

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  7. बहुत ही सुंदर, लघु तथा रोचक कथा, एक सार्थक संदेश के साथ समसामयिक भी..

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    1. जी, बहुत आभार आपके सुंदर वचनों का!!

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  8. दुश्मन जरूरी होते हैं हर यात्रा की सफलता के लिए।
    सारगर्भित कथा।

    सादर।

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  9. कथा का सार - हे शासक, तुम एकला दलो, एकला कुचलो और किसी की फ़रियाद पर भूल कर भी मत पिघलो !

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    1. हा हा हा, बिलकुल सही पकड़े सर!

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  10. बहुत बड़ी बात आपने लघु कथा में कह दी..

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