गलथेथरई
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Wednesday, 22 July 2026
कुछ बोलो जंतर मंतर
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नहीं ठहरता काल तनिक, तुमसे जादा कौन जाने। कितने आए कितने गए, लंगड़े, बहरे काने। ज़ख्म दिल्ली के हरे हुए फिर, आ गए आलमगीर। रुन्ड-मुन्ड चीखे द...
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Thursday, 4 June 2026
ख़बरनवीस बाज़ीगर बनिया!
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अनजाने ॐकारा भरती, गिरती-पड़ती हर की पौड़ी। ‘यू टू वर’ नीट धुरफ़ंथी, नहीं सुहाती फूटी कौड़ी। कबडी, कबडी, कबडी करती, चौथे खम्भे तक जा दौड़ी...
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Tuesday, 5 May 2026
कलम पर पहरा!
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क्या कहा कवि? कविता कह नहीं पा रहा! अन्दर का खदबदाता इंकलाब भीतर ही घुटता अटका ठहरा है। कारण, मुल्क का आम जन बहरा है। हो गई पंगु, पन्नों पर...
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Tuesday, 24 March 2026
बधाई जीते जी इलाहाबाद!
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हमारी सनातन संस्कृति ने विमर्श की परंपरा का पोषण किया है। विवादों के कलह से दूर शास्त्रीय परंपरा में समालोचना ही हमारी आलोचना-संस्कृति रही...
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Friday, 27 February 2026
सरपंच सच
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अश्वत्थामा शापित है जीने को। इस भारतखण्ड में। सपनों में। टुकड़ों-टुकड़ों में।एक के बाद एक चित्र सरकता है। ……..राजा गुरुकुल आए हैं। राजमुकुट...
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