जम्हूरी, जलालत ललाट,
नई सरकार, वही ' सम्राट'।
जो नैतिकता को काट- काट,
और मर्यादा छांट- छांट।
इज्जत आबरू चाट- चाट,
नराधमों में बांट- बांट।
हिंजड़े हाकिम को साट- साट,
इंसाफ की लगी हाट।
हक हुकूक की बंदरबांट
साबूत न कोई बचा पाट।
मानवता की खड़ी खाट
हैवानियत के ठाट- बाट।
बेटी का बाप हांफ- हांफ
बदहवास, घर घाट- घाट।
बेटी बचाओ, बेटी बचाओ,
नई सरकार, वही ' सम्राट'।
--- विश्वमोहन
#बिहारनिर्भया
वाह
ReplyDeleteजी, आभार🙏🏼
Deleteसर नमस्कार। बहुत ही सटीक और असरदार।
ReplyDeleteजी , आभार। लेकिन अनाम क्यों😄
Deleteवर्तमान परिप्रेक्ष्य पर सटीक चोट करता कविता 🙏
ReplyDeleteजी, आभार। लेकिन अनाम क्यों😄
Deleteसटीक सार्थक कविता.
ReplyDeleteजी, आभार।
Deleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 29 जनवरी 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
ReplyDeleteअथ स्वागतम शुभ स्वागतम।
जी, हार्दिक आभार!!
Deleteवाह!!!
ReplyDeleteक्या बात...
बहुत सटीक एवं धारदार।
जी, आभार।
Deleteसरकार की नीतियों की क्या बात! दीपक तले अंधेरा! एक होनहार बेटी को खोने का दर्द और भुगतभोगी पिता की पीड़ा संवेदनहीन सत्ताधारी कथित सम्राट क्या जाने! ना जाने कितनी निर्दोष बेटियां कामुक दरिंदों के हाथों अस्मत और जीवन दोनों गवां बैठी और अपराधी सुबूत ना होने अथवा छिपा या नष्ट करने के कारण बहुधा सजा ना पा सके! एक दुःखद प्रसंग और अंधी व्यवस्था को को यथावत आईना दिखाती मार्मिक रचना के लिए साधुवाद आदरणीय विश्व मोहन जी 🙏
ReplyDeleteजी, हार्दिक आभार।
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